"हिन्दी हम सबकी,पर हिन्दी का कौन ?"
"हिन्दी हम सबकी,पर हिन्दी का कौन ?" भाषा किसी व्यक्ति की पहचान होती है , भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है। ब्रिटिश लोग को हम अंग्रेज कहते थे और आज भी वही कहते हैं आर शायद आगे भी यही कहते रहें। क्यों ? क्योकि उनकी भाषा अंग्रेज़ी थी और वही उनकी पहचान बनकर रह गई। तो अगर हमारे हिन्दी पर खतरा होगी तो ये हमारे पहचान और अस्तित्व पर खतरा होगी।अगर आज हम हिन्दी के विकास और अधिकार के लिए संघर्षरत हैं तो तो इसका मतलब हम अपने अस्तित्व और पहचान के लिए संघर्षरत हैं और यह हमारे लिए गहन चिंतन का विषय है। इसे हिन्दी का दुर्भाग्य ना कहें तो क्या कहें की हिन्दी भाषा तो सबकी है पर मातृभाषा किसी की नहीं ? हम जितने धीर और गंभीर अपने मातृभाषा और नवबाला अंग्रेजी के प्रति रहते हैं उतनी ही धीर और गंभीर अगर अपनी हिन्दी के ...