सैद्धांतिक सहमति
राजनीति और नेताओं के दोहरे चरित्र को समझना टेढ़ी खीर होती है। अब देखिये ना अपने को भ्रष्टाचार का दुश्मन और सुशासन का झंडाबरदार कहने वाले नीतीश और केजरीवाल ने एक दूसरे से राजनीतिक गठजोड़ कर लिया है। जबकि केजरीवाल और नीतीश, लालू शासन काल के जंगलराज पर सोची- समझी चुप्पी साधे हुए है अर्थात नीतीश - लालू के गठजोड़ पर केजरीवाल की सैद्धांतिक सहमति मिल गयी है। परन्तु एक कहावत है जिससे केजरीवाल और नीतीश कुमार बच नहीं पाएंगे, की काजल के कोठरी में चाहे लाखो जतन करो, काजल के दाग भाई लागे ही लागे, भाई लागे ही लागे। केजरीवाल के प्रमाणपत्र देने से नीतीश कुमार बच नहीं सकते। मौजू सवाल तो उनसे पूछे ही जाने चाहिएं की आखिर क्यों उन्होंने ऐसे व्यक्ति से हाथ मिलाया जिसने बिहार को पिछड़ेपन, गरीबी, अशिक्षा और जंगलराज के गर्त में धकेल दिया था ? ऐसी क्या जरुरत और मज़बूरी आन पड़ी की बिहार को शर्मसार कर देने वाले चारा घोटाले के सूत्रधार से उन्होंने हाथ मिला लिया ? बिहारियों को पलायन और जलालत झेलने को मजबूर कर देने वाले व्यक्ति और...