घड़ियाली आँसू
कितना विचित्र और हास्यास्पद है नेताओं द्वारा यह कहना की केंद्र सरकार सीबीआई का दुरूपयोग कर रही है, और वह बदले की भावना से ऐसा कर रही हैं। जबकि वही नेता अपने विपक्षी नेताओं पर प्रथम दृष्टया आरोप पर ही सीबीआई जांच की मांग का राग अलापते रहते है। हाँ यही सही है कि सीबीआई केंद्र के हाथ में है और केंद्र सरकारें समय-समय पर इसका उपयोग अपना हित साधने के लिए करती रही है। दुरुपयोग बानगी तब दिखी थी जब कांग्रेस और द्रुमक का गठबंधन का खात्मा हुआ था उसी के एक दिन बाद सीबीआई ने करूणानिधि के बेटे एम.के.स्टॉलिन के घर छापा मारी थी । उस दिन सीबीआई के नियत और कार्रवाई के समय पर सवालिया निशान लगा और दुरुपयोग के आरोपों को बल मिला। ऐसे कई उदाहरण है। परन्तु हर बार ऐसा ही हो यह जरुरी नहीं। ताजा मामला एन.आर.एच.एम घोटाले का आरोप झेल रहीं बसपा सुप्रीमो और उनके तत्कालीन कैबिनेट सहयोगी बाबू सिंह कुशवाहा से सीबीआई के पूछताछ का है। मायावती ने तत्काल प्रभाव से संवाददाता सम्मलेन कर उनके दलित होने के कारण परेशान करने का आरोप केंद्र सरकार पर मढ़ा। बसपा सुप्रीमो के राजनीत...