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Showing posts from 2014

जीव हत्या और तुष्टिकरण।

गाय हमारी माँ है ,गाय करुणा की देवी है, गाय ममता की साक्षात प्रतिमुर्ति है, गाय जीवन दायनी अमृत है, और कुछ नहीं तो इतना जानिये गाय माँ है, सिर्फ मेरी नहीं, आपकी नहीं बल्कि हम सबकी माँ है। पता नहीं आज कितनें माँ कि बली चढा दी जायेगी।ये तो वही बात हुइ न की हम नारी को देवी कहते हैं, दुर्गा कहते हैं , जिस पुरूष की उत्पत्ति ही उस नारी के गर्भ से हुई है, फिर भी हम उसे गर्भ में ही समाप्त कर देते हैं, उसे वासना भरी नजरों से देखते हैं, यौन छींटाकशी एवं बालात्कार करते हैं। ठीक उसी तर ह हम गौ माता के साथ करते हैं कि हम उन्हें माँ तो मानते हैं, अमृत तुल्य दुध भी प्राप्त करते हैं फिर भी व्यापार और हत्या के लिए खुले बाजार में छोर देते हैं और अगर दुःख भी होता है तो हम यह सोच कर खा़मोश रहते हैं कि तथाकथित कुछ धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हमें सामप्रदायिक न कह दें। मैं सरकार से दरख्वास्त करूंगा की वो अविलंब जीव हत्या रोके वरन् विशेषकर गौ हत्या रोके क्योंकि गौ हत्या न सिर्फ जीव हत्या है बल्कि ये तो सनातनी संस्कृति की हत्या है और हर उस व्यक्ति की भावनाओं की भी हत्या है जो गाय को...

"सफाई की जरूरत हर ओर। "

"कहते हैं  मन चंगा तो कठौती में गंगा "  देख कर सुखद अनुभूति हो रही  है की आज देश में सफाई अभियान जोर शोर से चल रहा कचरे और कबारों का , पर मैं माननीय प्रधानमंत्री जी  का ध्यान उस ओर भी  दिलाना चाहता हूँ जहाँ की सफाई की अत्यंत आवश्यकता है।  १) गन्दी और कलंकित होती राजनीती जिसमें की अपराधियो,बाहुबलियों,पैसे वालो, भ्रष्टाचारियों , दंगाईयो, का बोलबाला और  दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।  २ ) भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हमारा प्रशासनिक अमला।   ३ ) अध्यात्म में बढ़ते बलात्कारियों ,जेहादियों का वर्चस्व जो समाज के भावुक लोगो को फांसकर उनको लूटते और बर्बाद करते हैं।  ४ ) चुनाव में पैसे वालों की दावेदारी में बढ़ोतरी।  ५ ) मीडिया की भी नियमन की जरुरत। ६  ) भ्रष्टाचार और लेटलतीफी का अड्ड़ा बन चुकी हमारी न्याय प्रणाली जिसका की सफाई अतिआवश्यक  है।  ७ ) गरीबों और जरूरतमंद लोगों का इलाज करने में असफ़ल हमारी चिकित्सा व्यवस्था से भी लालची डॉक्टरों  की सफाई भी आवश्यक है । ...

"हिन्दी हम सबकी,पर हिन्दी का कौन ?"

                    "हिन्दी हम सबकी,पर हिन्दी का कौन ?" भाषा किसी व्यक्ति की पहचान होती है , भाषा अभिव्यक्ति का माध्यम है।  ब्रिटिश लोग को हम अंग्रेज कहते  थे और आज भी वही कहते हैं आर शायद आगे भी यही कहते  रहें। क्यों ? क्योकि उनकी भाषा अंग्रेज़ी थी और वही उनकी पहचान बनकर रह गई। तो अगर हमारे हिन्दी पर खतरा होगी तो ये हमारे पहचान और अस्तित्व पर खतरा होगी।अगर आज हम हिन्दी  के विकास और अधिकार के लिए संघर्षरत  हैं  तो तो  इसका  मतलब  हम अपने अस्तित्व  और पहचान  के लिए संघर्षरत हैं और यह हमारे लिए गहन चिंतन  का विषय है।  इसे  हिन्दी का दुर्भाग्य ना कहें तो क्या कहें की हिन्दी भाषा तो  सबकी  है पर मातृभाषा किसी की नहीं ? हम जितने धीर  और गंभीर  अपने मातृभाषा और नवबाला अंग्रेजी के प्रति रहते हैं उतनी  ही धीर  और  गंभीर  अगर अपनी  हिन्दी  के ...

नैतिकता की दुहाई देना आसान है उसको क्रियान्यवित करना अत्यंत कठिन।

नैतिकता की दुहाई  देना आसान है उसको क्रियान्यवित करना अत्यंत कठिन। यही बात भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  के संबंध में  सही बैठती  है की जब  आपात काल के दशक में जब कांग्रेस नीत सरकार जब बहुमत के अपने उफान पर थी तब उसने देश को तक़रीबन २५ साल तक नेता प्रतिपक्ष  विहीन रखा था जिस कारण संसद में विपक्ष की आवाज ही दब सी गयी थी और सारे नीति -नियुक्तियां सरकार स्वयं ले रही थी। ध्यान देने योग्य बात यह है  की उसी विपक्ष के आभाव ने कांग्रेस सरकार को अहंकार के पराकाष्ठा पर ला खरा किया था जिस कारण देश  को हिला देने वाली घपले-घोटालों ,तुस्टीकरण के समस्या से  दो-चार होना पड़ा था ,उदाहरणार्थ  बोफोर्से  ,शाहबानो ,एवं तथाकथित बाबरी मस्जिद के द्वार के ताले तोड़ना जैसे  मामले घटित हुए थे।  आज वही नेता नैतिकता और संविधान की दुहाई दे रहे हैं जो उस समय सरकार के फैसले को संविधान सम्मत और लोकतान्त्रिक अधिकार की बात कर रहे थ ,और तो और संप्रग सरकार -२  में जब केंद्रीय सतर्कता आयुक्त  की नियुक्ति में भी नेता प्रतिपक...