जीव हत्या और तुष्टिकरण।


गाय हमारी माँ है ,गाय करुणा की देवी है, गाय ममता की साक्षात प्रतिमुर्ति है, गाय जीवन दायनी अमृत है, और कुछ नहीं तो इतना जानिये गाय माँ है, सिर्फ मेरी नहीं, आपकी नहीं बल्कि हम सबकी माँ है। पता नहीं आज कितनें माँ कि बली चढा दी जायेगी।ये तो वही बात हुइ न की हम नारी को देवी कहते हैं, दुर्गा कहते हैं , जिस पुरूष की उत्पत्ति ही उस नारी के गर्भ से हुई है, फिर भी हम उसे गर्भ में ही समाप्त कर देते हैं, उसे वासना भरी नजरों से देखते हैं, यौन छींटाकशी एवं बालात्कार करते हैं। ठीक उसी तरह हम गौ माता के साथ करते हैं कि हम उन्हें माँ तो मानते हैं, अमृत तुल्य दुध भी प्राप्त करते हैं फिर भी व्यापार और हत्या के लिए खुले बाजार में छोर देते हैं और अगर दुःख भी होता है तो हम यह सोच कर खा़मोश रहते हैं कि तथाकथित कुछ धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हमें सामप्रदायिक न कह दें।
मैं सरकार से दरख्वास्त करूंगा की वो अविलंब जीव हत्या रोके वरन् विशेषकर गौ हत्या रोके क्योंकि गौ हत्या न सिर्फ जीव हत्या है बल्कि ये तो सनातनी संस्कृति की हत्या है और हर उस व्यक्ति की भावनाओं की भी हत्या है जो गाय को माँ मानता है और नित्य उसे पुजता है। सही कहा है किसी ने कि जो व्यक्ति महज स्वाद के लिए मूक जीव की हत्या कर सकता है तो अगर वह व्यक्ति वासना और कामेक्षा में अगर किसी का बलात्कार करे तो कोई भारी बात नहीं होगी। 
हर रोज कितने ही पशुओं की तस्करी बांग्लादेश ,पाकिस्तान को जाता है पर सरकारें आँख पर पर्दा डाले हुए ख़ामोश बैठी रहती की कहीं हमारा वोट बैंक खिशक न जाए और तो और सरकारों की तुस्टीकरण तो देखिये की सत्ता में आने के बाद फिर से न सिर्फ कत्लखानो को खोला गया वरन की उसकी संख्या भी बढ़ा दी गयी ,उदहारण के लिए देखें तो हम पाते है की कैसे कर्नाटक में सिद्धारमैया के नेतृत्वा वाली कांग्रेस सरकार ने पूर्वर्ती सरकार द्वारा कत्लखानो पर लगाई गयी रोक को तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए कत्लखानो को खोलने का आदेश दिया था। तस्करी आज बाजार में जबरदस्त पैसा वाला धंधा बन गया है। इसमें कोई समुदाय विशेष नहीं शामिल है बल्कि सब शामिल है संत ,पंडित, आर तथाकथित कट्टर हिंदुत्व वादी ठेकेदार। मेरा ऐसा मानना है इसे भी हत्या के दायरे में लाया जाय आर वही कारवाय किया जाय जो भी करवाय धारा ३०२ के मातहत होता है। अगर ऐसा होता है तो हम सही मायने में मानवता का सच्चा परिचय देंगे और तो और सनातनी संस्कृती की रक्षा कर पायेंगें। 

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