जीव हत्या और तुष्टिकरण।
गाय हमारी माँ है ,गाय करुणा की देवी है, गाय ममता की साक्षात प्रतिमुर्ति है, गाय जीवन दायनी अमृत है, और कुछ नहीं तो इतना जानिये गाय माँ है, सिर्फ मेरी नहीं, आपकी नहीं बल्कि हम सबकी माँ है। पता नहीं आज कितनें माँ कि बली चढा दी जायेगी।ये तो वही बात हुइ न की हम नारी को देवी कहते हैं, दुर्गा कहते हैं , जिस पुरूष की उत्पत्ति ही उस नारी के गर्भ से हुई है, फिर भी हम उसे गर्भ में ही समाप्त कर देते हैं, उसे वासना भरी नजरों से देखते हैं, यौन छींटाकशी एवं बालात्कार करते हैं। ठीक उसी तर ह हम गौ माता के साथ करते हैं कि हम उन्हें माँ तो मानते हैं, अमृत तुल्य दुध भी प्राप्त करते हैं फिर भी व्यापार और हत्या के लिए खुले बाजार में छोर देते हैं और अगर दुःख भी होता है तो हम यह सोच कर खा़मोश रहते हैं कि तथाकथित कुछ धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हमें सामप्रदायिक न कह दें। मैं सरकार से दरख्वास्त करूंगा की वो अविलंब जीव हत्या रोके वरन् विशेषकर गौ हत्या रोके क्योंकि गौ हत्या न सिर्फ जीव हत्या है बल्कि ये तो सनातनी संस्कृति की हत्या है और हर उस व्यक्ति की भावनाओं की भी हत्या है जो गाय को...