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Showing posts from October, 2014

जीव हत्या और तुष्टिकरण।

गाय हमारी माँ है ,गाय करुणा की देवी है, गाय ममता की साक्षात प्रतिमुर्ति है, गाय जीवन दायनी अमृत है, और कुछ नहीं तो इतना जानिये गाय माँ है, सिर्फ मेरी नहीं, आपकी नहीं बल्कि हम सबकी माँ है। पता नहीं आज कितनें माँ कि बली चढा दी जायेगी।ये तो वही बात हुइ न की हम नारी को देवी कहते हैं, दुर्गा कहते हैं , जिस पुरूष की उत्पत्ति ही उस नारी के गर्भ से हुई है, फिर भी हम उसे गर्भ में ही समाप्त कर देते हैं, उसे वासना भरी नजरों से देखते हैं, यौन छींटाकशी एवं बालात्कार करते हैं। ठीक उसी तर ह हम गौ माता के साथ करते हैं कि हम उन्हें माँ तो मानते हैं, अमृत तुल्य दुध भी प्राप्त करते हैं फिर भी व्यापार और हत्या के लिए खुले बाजार में छोर देते हैं और अगर दुःख भी होता है तो हम यह सोच कर खा़मोश रहते हैं कि तथाकथित कुछ धर्मनिर्पेक्षता के ठेकेदार हमें सामप्रदायिक न कह दें। मैं सरकार से दरख्वास्त करूंगा की वो अविलंब जीव हत्या रोके वरन् विशेषकर गौ हत्या रोके क्योंकि गौ हत्या न सिर्फ जीव हत्या है बल्कि ये तो सनातनी संस्कृति की हत्या है और हर उस व्यक्ति की भावनाओं की भी हत्या है जो गाय को...

"सफाई की जरूरत हर ओर। "

"कहते हैं  मन चंगा तो कठौती में गंगा "  देख कर सुखद अनुभूति हो रही  है की आज देश में सफाई अभियान जोर शोर से चल रहा कचरे और कबारों का , पर मैं माननीय प्रधानमंत्री जी  का ध्यान उस ओर भी  दिलाना चाहता हूँ जहाँ की सफाई की अत्यंत आवश्यकता है।  १) गन्दी और कलंकित होती राजनीती जिसमें की अपराधियो,बाहुबलियों,पैसे वालो, भ्रष्टाचारियों , दंगाईयो, का बोलबाला और  दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।  २ ) भ्रष्टाचार में आकंठ डूबा हमारा प्रशासनिक अमला।   ३ ) अध्यात्म में बढ़ते बलात्कारियों ,जेहादियों का वर्चस्व जो समाज के भावुक लोगो को फांसकर उनको लूटते और बर्बाद करते हैं।  ४ ) चुनाव में पैसे वालों की दावेदारी में बढ़ोतरी।  ५ ) मीडिया की भी नियमन की जरुरत। ६  ) भ्रष्टाचार और लेटलतीफी का अड्ड़ा बन चुकी हमारी न्याय प्रणाली जिसका की सफाई अतिआवश्यक  है।  ७ ) गरीबों और जरूरतमंद लोगों का इलाज करने में असफ़ल हमारी चिकित्सा व्यवस्था से भी लालची डॉक्टरों  की सफाई भी आवश्यक है । ...