बौद्धिक दिवालियापन का शिकार पाकिस्तानी मीडिया


किसी ने बहुत ही वाजिब कहा था की मीडिया लोकतंत्र का चौथा खंभा होता है, तो किसी ने आगे बढ़ते हुए कहा कि मीडिया लोकतंत्र का आत्मा होता है. मीडिया जनमत का प्रतिनिधित्व करता है, उसका निर्माण करता है. परंतु पाकिस्तानी मीडिया की मौजूदा हालात को देखकर तो कहीं से नहीं कहा जा सकता है, कि वह इन पैमानों पर खरा  उतरता है. अगर वैश्विक मीडिया की विषयवस्तु, प्रस्तुति और तकनीक की बात करें तो हम कह सकते हैं कि पाक मीडिया अभी पैदा भी नहीं हुआ है. वैश्वीकरण के इस दौर में जहां विश्व मीडिया अपनी मजबूरी के कारण समूचे विश्व को अपने विषय वस्तु मे शामिल कर रहें है, वहीं पाक मीडिया अभी भी भारत पर ही अटकी हुई है। यह तो वही बात हुई ना की जहां विश्व की मीडिया अब खबर से आगे की बात कर रही है और शोध आधारित कन्टेन्ट पर ज़ोर दे रही है, वहीं पाकिस्तानी मीडिया अभी तक पेड न्यूज़ प्रोग्राम से बाहर नहीं निकल पाई है. कभी मोदी इस्लाम के दुशमन करार दिये जाते हैं तो कभी नवाज के दोस्त जो एक मुसलमान ही हैं. 


चार चीज़ें पाक मीडिया में छाए रहते है, वह है कि, आज कि इंडिया की क्या लीड है ?, अमेरिका की लीड क्या है, वह क्या सोच रहा है ?, खित्ते (क्षेत्र) में किसकी लीड है ?, और इस्लामिक बिरादरी मुल्क की लीड क्या है ?  कुल मिलाकर पाकिस्तानी मीडिया अरसों से इन्हीं चारो मसलों पर अटका हुआ है.  ज़्यादातर मुद्दे भारत के अंदुरुनी हालात पर आधारित होते हैं. कह सकते हैं पाकिस्तान में कुछ भी डिप्लोमेटिक नहीं है ठीक वैसे ही जैसे उनकी अंग्रेजी और भ्रष्ट उर्दू.

ज्यादा पीछे जाने की जरूरत नहीं है आप पिछले 2 महीनो के घटना क्रम जो भारत के अंदुरुनी मसले है, उनको उठाएँ तो हम पाते हैं की वह पाक मीडिया की लीड खबर है. यह अलग मसला है कि पाक गरीब और भ्रष्ट देशों का सबसे अगुआ मुल्क है. जहां आश्चर्यजनक रूप से बेशन सस्ते हैं और दाल महंगे हैं. पाकिस्तान कर्ज को ना चुका पाने के कारण दिवालिया होने के कगार पर है. जहां के प्रधानमंत्री, पनामा पेपर में नाम आने से देश की फजीहत करा चुके है , वहीं की मीडिया हर रोज, हर कार्यक्रम में भारतीय प्रधानमंत्री को बड़ी बेशर्मी से दहशतगर्ग करार देता है. प्रधानमंत्री मोदी को लज्जत भरे लहजे में चाय बेचने वाला कहा जाता है, वहीं इस बात को भुला दिया जाता है की उसकी आधे से ज्यादा पाकिस्तानी कौम प्रतिदिन चाय पीने मे असक्षम है.


 बीते अप्रैल ब्रिटिश शाही जोड़ा भारत के दौरे पर था. इसको लेकर भी पाक मीडिया मे जमकर मातम मनाया गया. हद तो तब हो गयी जब पाकिस्तान का सबसे पहला HD चैनल, 92HD न्यूज़ की प्रोस्तोता(एंकर) अनिका निसार ने बड़े ही दुख भरे लहजे मे अपने पैनेल से सवाल किया की भारत मे भी तो दहशतगर्दी बहुत हैं, बहुतेरों मसले- मसाइल हैं, और 20 से ज्यादा तो आज़ादी की जंग चल रहे हैं, फिर भी शाही जोड़ा भारत जा रहे हैं, पाक क्यों नहीं आए ? मेहमान विश्लेषक तनवीर सहजाद ने भी मोहतरमा के शब्दों पर अपनी हामी भरी और उन्होंने भी डायना के प्यार का जिक्र कर मातम मनाया.  साथ ही लाहौर की बिरयानी का जिक्र कर अपनी बौद्धिकता का परिचय दिया. इस चैनल के अलावा कुछ अन्य चैनलों मे प्रधानमंत्री मोदी का मेघालय और पूर्वोतर राज्यों के दौरान स्थानीय कलाकारों के साथ ढ़ोल बजाना भी खबर बन गया. वरिष्ठ विश्लेषक ब्रिगेडियर रिटायर फहरुख रशीद कहते हैं की मोदी साहब झूठ का ढ़ोल पीटने मे माहिर है, हमें इससे बच कर रहने की जरूरत है.

हाल ही में भारतीय जांच एजेंसी एनआईए(NIA) के मुखिया जनाब शरद कुमार ने अपने एक बयान मे, पठानकोट हमले को लेकर पाक सरकार के शामिल होने की बात को नकारा परंतु पाकिस्तानी सरजमीं से हुई वारदात पर भारत के रुख पर वह कायम रहे, पर पाक मीडिया मे जोरदार फिल गुड की हवा बही और हँगामा बरपा की एनआईए ने पाक को क्लीनचिट दी है. बाद मे बयान पर स्पष्टीकरण आई तो पाक मीडिया की भारी फजीहत हुई.

बीते महीने 22 एवं 23 मई को प्रधानमंत्री मोदी ईरान दौरे पर थे. वहां उनका रणनीतिक और आर्थिक लिहाज से अतिमहत्वपूर्ण चावहार पोर्ट पर ईरान से समझौता हुआ और अफगान के साथ तीनों देशों ने संयुक्त व्यापार पर सहमत हुए. इस दौरे ने तो जैसे पाक मीडिया में तूफान खड़ा कर दिया. पाक मीडिया में एक चैनल है ARY न्यूज़ जिसमें एक कार्यक्रम आता है Live with Dr. Shaahid masood जिसके होस्ट मशूद साहब दौरे से पहले चावहार और भारत-अफगान-ईरान के साथ आने और उसके फ़ायदों पर विस्तार से चर्चा किए, लेकिन मूआयदा हो जाने के बाद उन्होने भारतीय वजीरे आजम मोदी को जमकर कोसा और इन समझौतों के फ़ायदों को नकारते हुए मोदी द्वारा पढे गए गालिब के शेर पर जमकर भड़ास निकाली। अन्य चैनलों ने भी चावहार समझौते को CPEC (china Pakistan economic corridor ) को असफल करने की साजिश का रोना रोया। Waqt न्यूज़ के insight कार्यक्रम मे जनाब सलाम बुखारी और चैनल 24 के खड़ा सच कार्यक्रम मे वाइस मार्शल शहीद लतीफ कहते हैं हैं की भारत की कोशिश है की पाक को खित्ते( दक्षिण एशिया ) में हर हालत में तन्हा किया जाए. ऐसा ही रुख लगभग चैनल वन, डॉन, और 92Hd का था. हर मुल्क की अपनी पसंद और कूटनीति के तरीके होते हैं इसकी चिंता वो हम पर छोड़ दिये.

फरवरी-मार्च के दौरान पाक सेना ने ईरान सीमा के करीब उसने भारतीय नौसेना के पूर्व सैन्य अधिकारी सह व्यापारी कुलभूषन जादव को किडनैप किया और RAW का एजेंट घोषित किया. उसका फर्जी कबूलनामा का विडियो बनाया और मीडिया को भेजा। मीडिया ने भी आउ न देखा ताऊ उसे एक्सक्लूसिव समझ कर चला दिया। बाद मे जब उस विडियो को भारतीय मीडिया के तकनीक विशेषज्ञों ने जांचा तो वह विडियो DOCTORED निकली, जिससे पाक मीडिया की एक बार फिर भारी फजीहत हुई और उसी तकनीकी समझ और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हुए.


अरसों से अमेरिका पाकिस्तान का दोस्त रहा है और उसे आर्थिक और सैन्य मदद देता रहा है, परंतु पिछले दिनों इसममें बड़ी तबदीली देखने को मिली, अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया जाने वाला F16 लड़ाकू विमान देने से माना कर दिया और यह शर्त रखी कि अगर पाकिस्तान को यह विमान चाहिए तो उसे 70 अरब डॉलर का भुगतान करने होंगे . इसे भी भारत का साजिश माना गया और तकरीबन हर चैनल ने अमेरिका से अपने दोस्ती के हवाले से खूब हँगामा बड़पाया. इसे भारतीय शरमायाकारी(लॉबिंग) कि साजिश बताया गया. ठीक इसी तरह अन्य अंदुरुनि मसले जैसे भारत का GPS satellite का प्रक्षेपण को पाकिस्तान के अंदुरुनी और खुशुसी मामलात पर नजर रखने के लिए बनाया गया है ऐसे आरोप लगाए गए. Anti ballistic मिसाइल पर पाक विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज का बयान आया, उसपर पाक मीडिया ने जमकर prime टाइम शो किए.

पाकिस्तान खुद को इस्लामिक मुल्कों का सबसे अगुआ देश मानता है. उसकी अपनी वजह है, किसी भी इस्लामिक मुल्क के पास परमाणु हथियार नहीं है, सिर्फ पाक को छोड़ कर। इसलिए वह अपने आपको भारत सहित तमाम NSG मे शामिल मुल्कों के समकक्ष समझता है. भारत ने जब इस ग्रुप मे शामिल होने के लिए आवेदन दिया तो पाकिस्तान ने भी खुद कि अर्जी लगाई. भारत कि अर्जी पर पाक चैनल 92HD के फरहूख हमीद साहब ने यह तक कह दिया भारत का परमाणु हथियार एकबार चोरी भी हो चुका है और पाक कि सबसे सुरक्षित परमाणु हथियार ठिकाने हैं. अब इसे क्या कहा जाये ?

भारतीय वजीरे आजम कि कोशिश है कि खाड़ी देशों से सुस्त पड़े रिश्तों मे नयी जान फूंकी जाए और अपने ताल्लुकात बढ़ाई जाए, इसे भी पाकिस्तानि मीडिया ने पाकिस्तान को इस्लामिक बिरादरी से अलग- थलग करने कि साजिश का हिस्सा माना. सऊदी अरब ने प्रधानमंत्री को जब वहाँ का सबसे बड़े सम्मान से नवाजा तो यह बात पाक मीडिया को नागवार गुजरा, उसने मोदी साहब की मीडिया ट्राइल करनी शुरू कर दी. पाक मीडिया अपने मुल्क कि खारजा पॉलिसी से ज्यादा भारतीय प्रधानमंत्री का यूएई मे हुए एक सार्वजनिक सभा पर चिंता होती रहती है.

मसला यह नहीं कि हम क्यों नहीं असला(हथियार) बनाने मे सक्षम है ? मसला यह नहीं कि, क्यों हम सिर्फ चाइना को दोस्त कह पा रहे है ? बजाए इसके कि सिविल-मिलिट्री संबंध, मसला यह नहीं कि अभी तक पाक का लोकतन्त्र क्यों हिचकोले खा रहा है ? मसला यह नहीं कि, पाक मे अभी विदेश मंत्री क्यों नहीं है ? मसला यह नहीं कि क्यों पाकिस्तान दहशतगर्दी का सबसे मुफीद पनाहगाह है ? क्यों पाक दुनिया का सबसे ज्यादा पोलियो मरीज पैदा करने वाला मुल्क है? क्यों पाक न बढ़ झेल पाता है, ना ही बिजली की समस्या से निजात पाया सका है ?  इनके बजाए, पाक मीडिया के लिए मसला है बिहार चुनाव, गुलबर्गा दंगे कि रिपोर्ट आदि

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ऐसा नहीं है कि पाकिस्तानी मीडिया मे सभी ऐसे ही हैं. इनसबके बाबजूद हसन निसार की तरह कड़वे परंतु सच बोलने वाले पत्रकार भी है जो कि सेना, तालिबानी आतंकी, अवाम, धार्मिक बिरादरी और सरकार, सबकी जलालत झेलते हुए भी सत्य पर अडिग रहते हैं. इंनका आंकड़ा छोटा है परंतु आवाज इनकी काफी बुलंद है.     
        
  



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