"शहीद ए आजम केजरीवाल ! "
मित्रों संप्रग-2 के अंतिम व् सरकार के तत्कालीन गृह मंत्री श्री सुशील शिंदे उस समय एक सार्वजनिक मंच से बयान दिया था की देश की जनता को भूलने की बीमारी है वह 1 हफ्ते में मामले को ऐसे भुला बैठती है जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। खैर श्री शिंदे ने जो भी कहा और जिस भी परिपेक्ष्य में कहा हो परंतु कही बिल्कुल जायज़ और लाख टके की बात। उस समय हो रहे घपले घोटाले और सीमा पार से फायरिंग की घटना से सरकार काफी दबाब में थी और अंतोगत्वा शिंदे के दिल की बात जुबाँ पर आ ही गयी। अकसर सरकारें यही सोच कर चने बेचती रहती हैं की जनता का क्या जनता कुछ दिन में सब भूल जाएगी। अब देखिए ना केजरीवाल और उपराज्यपाल के बीच सुनियोजित जंग में जनता ने सारे विवादस्पद मामले को भुला बैठे। याद कीजिए ये मामले थे कुमार विश्वास का महिला वाला मामला , गजेन्द्र सिंह की आत्महत्या वाला मामला , जितेंद्र तोमर का फ़र्ज़ी डिग्री वाला मामला। खैर जो भी हो केजरीवाल ने तो जोर का दम और दम लगाया है। आगे..
दिल्ली में विगत कुछ दिनों से जारी रस्साकशी और अधिकारों का अतिक्रमण की जो जंग जारी है उससे तो इतना जाहिर है कि केजरीवाल अब जाके वस्तुस्थिति को समझे हैं या पहले जान बुझ कर अनजान बने रहे। ऐसा नहीं है की इस आरटीआई पुरुष को संवैधानिक और कानून की जानकारी नहीं थी की मुख्यमंत्री के क्या अधिकार हैं। मामला यह नहीं की केजरीवाल की मांग सही है या गलत ; दरअसल मामला यह है की केजरीवाल संविधान का खुला मजाक बना रहे हैं और केंद्र से आर - पार के स्थिति में हैं । इससे उन्हें काम करने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि दिल्ली सरकार की नियति है की उसे केंद्र से सहयोग बना कर चलना पड़ता है। इस मामले में फायदा और नुकसान का आकलन किया जाए तो हम पाते हैं की एक बार पुनः नुकसान में जनता ही रही और फायदे में केजरीवाल ; केजरीवाल अपने को स्थिति का मारा और शहीद घोषित करने में सफल हो गए हैं। मुद्दे की आर में झाँके तो हम पाते हैं की केजरीवाल, आप पार्टी के सारे कारनामों को गौण करने में सफल रहे हैं। गजेन्द्र किसान की आत्महत्या , विश्वास मामला और जीतेन्द्र तोमर का फ़र्ज़ी डिग्री वाला मामला। खैर कामकाज का आकलन तो 5 साल बाद दिल्ली की जनता करेगी परंतु तत्काल तो केजरीवाल एंड बैंड पार्टी ने सारे विवादस्पद मामले से जनता और देश से ध्यान भटकाने में सफल हो गए हैं। और केजरीवाल बन गए "शहीदे आजम केजरीवाल।"
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